Saraikela (संजीव मेहता):
श्रद्धालु भक्त रविवार से ही घूमेंगे प्रवीण सेवा संस्थान एम टाइप का पंडाल, 11 अक्टूबर को शाम 6 बजे भव्य उद्घाटन, प्राचीन देवी-देवताओं और विभिन्न पौराणिक दानवों के सजीव मॉडल्स स्थापित, 63 लाख खर्च कर बनाए गए हैं भव्य पंडाल
Saraikela :



आदित्यपुर के एम टाइप मैदान में निर्मित प्रवीण सेवा संस्थान का भव्य दुर्गा पूजा पंडाल का पट 11 अक्टूबर रविवार को ही खुल रहा है. इस बात की जानकारी पूजा कमेटी के पदाधिकारी ने आधिकारिक रूप से दी है. इस वर्ष यहां शारदीय नवरात्रि के पावन अवसर पर दुर्गा पूजा की तैयारियां अत्यंत भव्य एवं आकर्षक पूजा पंडाल का निर्माण कर किया है. पंडाल को अंतिम और भव्य रूप देने के लिए पश्चिम बंगाल के मेचेदा से आए कुशल व हुनरमंद कारीगर दिन-रात मेहनत कर रहे हैं. आयोजकों का दावा है कि इस वर्ष यह पूजा पंडाल पूरे क्षेत्र में आने वाले श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र साबित होगा.
* दक्षिण भारतीय और हिमालयी मंदिर शैली का अनूठा संगम-
पूजा समारोह के आयोजन और निर्माण की सभी तैयारियां पूजा कमिटी के मुख्य संरक्षक एवं ईचागढ़ के पूर्व विधायक अरविन्द कुमार सिंह की प्रत्यक्ष देखरेख में पूरी की जा रही हैं. उन्होंने बताया कि भले ही लोग इसे अपनी-अपनी तरह से अलग-अलग नाम दे रहे हों, लेकिन यह पंडाल पूरी तरह से एक अनोखी और मौलिक थीम पर आधारित है. इसमें दक्षिण भारतीय मंदिर स्थापत्य और हिमालयी मंदिर शैली का अद्भुत व दुर्लभ सम्मिश्रण देखने को मिलेगा.
* जीवंत पहाड़, बहते झरने और पौराणिक पात्रों के सजीव मॉडल-
पूर्व विधायक अरविन्द कुमार सिंह ने पंडाल की विशेषताओं की जानकारी देते हुए बताया कि इस बार पंडाल को एक नए स्वरूप के ‘पहाड़’ का रूप दिया जा रहा है. इसमें प्राकृतिक रूप से बहते हुए झरने दिखाई देंगे. साथ ही सीढ़ियों की संरचना इस प्रकार तैयार की जा रही है जिससे पंडाल में प्रवेश करते समय श्रद्धालुओं को वास्तविक पहाड़ पर चढ़ने जैसा जीवंत और रोमांचक अनुभव होगा. इसके अतिरिक्त, पंडाल परिसर में प्राचीन देवी-देवताओं और विभिन्न पौराणिक दानवों के सजीव मॉडल्स भी स्थापित किए जा रहे हैं, जो दर्शनार्थियों के अनुभव को यादगार बनाएंगे.
* हल्के काले शेड्स से ऐतिहासिक रंग-सज्जा
इस बार पूजा पंडाल की रंग-सज्जा में भी विशेष प्रयोग किया गया है. इसे ऐतिहासिक, भव्य और मनमोहक स्वरूप देने के लिए हल्के काले (लाइट ब्लैक) रंग के शेड्स का मुख्य रूप से उपयोग किया जा रहा है. वर्तमान में पंडाल के भीतरी और बाहरी दोनों हिस्सों का काम द्रुत गति से चल रहा है.




