Saraikela (संजीव मेहता): 14 साल बाद भी नहीं मिला सेवानिवृत्ति का बकाया, अब सरकारी आवास खाली करने का फरमान, आर्थिक तंगी से जूझ रहे सेवानिवृत्त स्वास्थ्यकर्मी सुरेंद्र गोस्वामी ने एसडीओ से लगायी गुहार

Sanjeev mehta
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Saraikela (संजीव मेहता):

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14 साल बाद भी नहीं मिला सेवानिवृत्ति का बकाया, अब
सरकारी आवास खाली करने का फरमान, आर्थिक तंगी से जूझ रहे
सेवानिवृत्त स्वास्थ्यकर्मी सुरेंद्र गोस्वामी ने एसडीओ से लगायी गुहारSaraikela :
सरकारी सेवा से सेवानिवृत्त होने के 14 वर्ष बाद भी भविष्य निधि की बकाया राशि नहीं मिलने से आर्थिक तंगी झेल रहे कुचाई के सेवानिवृत्त स्वास्थ्यकर्मी सुरेंद्र कुमार गोस्वामी की परेशानी अब और बढ़ गई है. एक ओर उन्हें अब तक सेवानिवृत्ति का पूरा लाभ नहीं मिला है, वहीं दूसरी ओर प्रशासन की ओर से पुराने सरकारी आवास को खाली करने का निर्देश जारी कर दिया गया है. ऐसे में उनके सामने आर्थिक संकट के साथ-साथ रहने की व्यवस्था करने की भी चुनौती खड़ी हो गई है. इस संबंध में उन्होंने सरायकेला अनुमंडल पदाधिकारी को आवेदन देकर लंबित भविष्य निधि राशि का भुगतान कराने और सरकारी आवास खाली करने के लिए अतिरिक्त समय देने की गुहार लगाई है. एसडीओ को दिए आवेदन में सुरेंद्र कुमार गोस्वामी ने बताया कि उन्होंने 28 अप्रैल 1981 को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, कुचाई में स्वास्थ्य कार्यकर्ता सह प्रतिनियुक्त लेखापाल के पद पर अपनी सेवा शुरू की थी. लंबे समय तक विभाग में कार्य करने के बाद 31 मई 2012 को सेवानिवृत्त हुए. लेकिन सेवानिवृत्ति के 14 वर्ष बीत जाने के बावजूद उन्हें भविष्य निधि की बकाया राशि का भुगतान नहीं किया गया है. उन्होंने अपने आवेदन में भविष्य निधि का पुराना लेखा संख्या एमईडी-51586 (बीएमआर) तथा नया लेखा संख्या एसजीबी/एमईडी/673 का उल्लेख करते हुए संबंधित राशि का भुगतान कराने की मांग की है. गोस्वामी के अनुसार, सेवानिवृत्ति के बाद मिलने वाली भविष्य निधि की राशि उनके लिए बुढ़ापे का सहारा और पारिवारिक जरूरतों को पूरा करने का महत्वपूर्ण साधन थी. लेकिन 14 वर्षों से भुगतान लंबित रहने के कारण उन्हें लगातार आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. आर्थिक अभाव के चलते बेटी की शादी और मकान निर्माण जैसे महत्वपूर्ण कार्य भी पूरे नहीं कर पा रहे हैं. उनका कहना है कि यदि समय पर सेवानिवृत्ति की बकाया राशि मिल जाती तो उन्हें इस तरह की परेशानियों से नहीं गुजरना पड़ता.

* 6 नवंबर तक सरकारी आवास खाली करने का निर्देश-

सेवानिवृत्त स्वास्थ्यकर्मी की परेशानी उस समय और बढ़ गई, जब उन्हें पुराने सरकारी आवास को खाली करने का निर्देश मिला. उन्होंने आवेदन में बताया कि पुराने प्रखंड परिसर में स्थित सरकारी आवास में रहकर वह अपने खर्च पर गरीब बच्चों को पढ़ाने का काम भी करते रहे हैं. अब अचानक आवास खाली करने का आदेश मिलने से उनके सामने रहने की वैकल्पिक व्यवस्था करने की समस्या उत्पन्न हो गई है. उन्होंने बताया कि अनुमंडल पदाधिकारी के आदेश पत्रांक 696/गो., दिनांक 28 सितंबर 2026 के आलोक में उन्हें 6 नवंबर 2026 तक सरकारी आवास खाली करने का निर्देश दिया गया है. जबकि उनकी आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं है कि वह तत्काल दूसरा आवास लेकर रहने की व्यवस्था कर सकें. गोस्वामी ने अपने आवेदन में यह भी उल्लेख किया है कि पुराने प्रखंड परिसर से प्रखंड कार्यालय नए भवन में स्थानांतरित हो चुका है. वहीं, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र का नया सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भवन भी ग्राम महाबुरु में बनकर तैयार हो गया है। इसके बाद पुराने परिसर में स्थित सरकारी आवास को खाली कराने की प्रक्रिया शुरू हुई है. हालांकि, उनका आग्रह है कि जब तक भविष्य निधि की लंबित राशि का भुगतान नहीं हो जाता और वह रहने की दूसरी व्यवस्था नहीं कर लेते, तब तक उन्हें आवास खाली करने के लिए कुछ अतिरिक्त समय दिया जाए.

* मुख्यमंत्री से लेकर स्वास्थ्य सचिव तक भेजी आवेदन की प्रतिलिपि-

सेवानिवृत्त स्वास्थ्यकर्मी ने प्रशासन से मानवीय आधार पर मामले में हस्तक्षेप करने की मांग की है. उन्होंने भविष्य निधि की लंबित राशि का जल्द भुगतान कराने तथा आवास खाली करने की समय-सीमा बढ़ाने का आग्रह किया है, ताकि वह अपनी आर्थिक स्थिति संभालकर वैकल्पिक आवास की व्यवस्था कर सकें. इस मामले में उन्होंने अपने आवेदन की प्रतिलिपि सिविल सर्जन, अनुमंडल पदाधिकारी, पुलिस अधीक्षक, उप विकास आयुक्त, झारखंड के स्वास्थ्य मंत्री, मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव, लोकायुक्त, कुचाई के अंचलाधिकारी और स्वास्थ्य सचिव को भी भेजी है. अब देखना यह है कि 14 वर्षों से लंबित सेवानिवृत्ति लाभ के भुगतान को लेकर संबंधित विभाग कब तक कार्रवाई करता है और आर्थिक संकट से जूझ रहे सेवानिवृत्त स्वास्थ्यकर्मी को सरकारी आवास खाली करने के लिए अतिरिक्त समय मिल पाता है या नहीं.

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