Saraikela (संजीव मेहता): गंजिया बराज से खेतों तक पहुंचेगा पानी, आधुनिक सिंचाई से किसानों की समृद्धि का लक्ष्य ‘समृद्धि की पाठशाला’ में जल प्रबंधन, पाइपलाइन सिंचाई और किसान सहभागिता पर जोर

Sanjeev mehta
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Saraikela (संजीव मेहता):
गंजिया बराज से खेतों तक पहुंचेगा पानी, आधुनिक सिंचाई से किसानों की समृद्धि का लक्ष्य
‘समृद्धि की पाठशाला’ में जल प्रबंधन, पाइपलाइन सिंचाई और किसान सहभागिता पर जो

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* खरकाई नदी का पानी किसानों के खेतों तक पहुंचाने की पहल, लगभग 3,000 एकड़ क्षेत्र में सिंचाई की संभावनाएं, आधुनिक तकनीक, प्राइमरी फिल्ट्रेशन सिस्टम और वाटर यूजर सोसाइटी के माध्यम से कृषि व्यवस्था को मजबूत करने पर जोर

Saraikela :
झारखंड के सरायकेला-खरसावां जिले के गम्हरिया प्रखंड में स्थित गंजिया बराज से जुड़ी सिंचाई परियोजना को लेकर आयोजित ‘समृद्धि की पाठशाला’ कार्यक्रम में किसानों को आधुनिक सिंचाई तकनीक, जल प्रबंधन और सरकारी योजनाओं की जानकारी दी गई. कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को सिंचाई व्यवस्था की कार्यप्रणाली से अवगत कराना और जल संसाधनों के बेहतर उपयोग में उनकी भागीदारी सुनिश्चित करना था.
कार्यक्रम में केंद्रीय जल आयोग (CWC), रांची के निदेशक शशि राकेश, जल शक्ति मंत्रालय से जुड़े उपनिदेशक शुभम पचौड़ी तथा अन्य संबंधित अधिकारियों ने सिंचाई योजनाओं के विकास, तकनीकी व्यवस्था और किसानों के लिए उपलब्ध संभावनाओं पर जानकारी दी. कार्यक्रम में राज्य स्तरीय क्रियान्वयन रणनीति, क्लस्टर की प्रगति, जल उपभोक्ता समितियों की भूमिका और किसानों के सवालों पर चर्चा भी निर्धारित थी. खरकाई नदी से पंप हाउस के जरिए खेतों तक पहुंचेगा पानी परियोजना से जुड़े संबोधन में परियोजना के अधिक्षण अभियंता कुमार अरविंद ने बताया कि खरकाई नदी से पंप हाउस के माध्यम से पानी उठाकर पाइपलाइन के जरिए कृषि भूमि तक पहुंचाने की व्यवस्था की जा रही है. वक्ता के अनुसार, परियोजना का कुल क्षेत्र लगभग 3,000 एकड़ बताया. इस प्रणाली का उद्देश्य किसानों को सिंचाई के लिए अधिक व्यवस्थित तरीके से पानी उपलब्ध कराना और बारिश पर निर्भरता कम करने में मदद करना है. पानी की उपलब्धता बेहतर होने पर किसान पारंपरिक फसलों के साथ मक्का, सब्जियों, फलों, मसालों और अन्य नकदी फसलों की खेती की संभावनाएं तलाश सकते हैं. अनुकूल परिस्थितियों में एक वर्ष में दो से तीन फसलें लेने के अवसर भी बढ़ सकते हैं. हालांकि, वास्तविक लाभ पानी की नियमित उपलब्धता, फसल की लागत, बाजार मूल्य और सिंचाई व्यवस्था के प्रभावी संचालन पर निर्भर करेगा.

* पानी की बर्बादी रोकने के लिए आधुनिक तकनीक –

CWC रांची के निदेशक शशि राकेश ने अपने संबोधन में सिंचाई योजनाओं के विकासक्रम और उनकी पुरानी चुनौतियों को समझाया. उन्होंने त्वरित सिंचाई लाभ कार्यक्रम (AIBP) तथा कमांड एरिया डेवलपमेंट एंड वाटर मैनेजमेंट (CADWM) जैसी पहलों का उल्लेख करते हुए बताया कि सिंचाई परियोजनाओं का उद्देश्य केवल नहरों तक पानी पहुंचाना नहीं, बल्कि खेतों तक उसका प्रभावी वितरण सुनिश्चित करना भी है. पारंपरिक खुली नहरों में पानी की बर्बादी, नहरों की टूट-फूट और ऊंचाई पर स्थित या दूरस्थ खेतों तक पानी पहुंचाने की कठिनाइयां सामने आती रही हैं. आधुनिक पाइपलाइन आधारित सिंचाई व्यवस्था इन समस्याओं को कम करने में मदद कर सकती है.
इस व्यवस्था की वास्तविक सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि पानी प्रत्येक किसान तक निर्धारित समय और आवश्यक मात्रा में पहुंचता है या नहीं.
प्राइमरी फिल्ट्रेशन सिस्टम से सुरक्षित होगी ड्रिप सिंचाई
परियोजना के तकनीकी विवरण में पंप हाउस के पास प्राइमरी फिल्ट्रेशन सिस्टम लगाने का प्रावधान बताया गया. इसका उद्देश्य नदी के पानी में मौजूद मिट्टी, रेत और अन्य ठोस कणों को हटाना है. यह व्यवस्था विशेष रूप से ड्रिप और स्प्रिंकलर सिंचाई में महत्वपूर्ण है. पानी में मौजूद कण ड्रिप के छोटे छिद्रों और स्प्रिंकलर के नोजल को जाम कर सकते हैं, जिससे सिंचाई प्रभावित होती है।
उचित फिल्ट्रेशन और नियमित रखरखाव से इन समस्याओं को कम करने में सहायता मिल सकती है. हालांकि, फिल्टर की वास्तविक क्षमता और पानी की गुणवत्ता के अनुसार अतिरिक्त उपचार की जरूरत भी हो सकती है.

* वाटर यूजर सोसाइटी: किसानों की भागीदारी पर जोर –

कार्यक्रम में वाटर यूजर सोसाइटी को जल प्रबंधन की महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में प्रस्तुत किया गया.
किसानों से इस संस्था में पंजीकरण कराने और व्यक्तिगत हितों के साथ सामूहिक हितों को प्राथमिकता देने की अपील की गई.
इस संस्था की भूमिका पानी के वितरण, सिंचाई व्यवस्था के रखरखाव, उपलब्ध जल का हिसाब रखने और किसानों के बीच समन्वय स्थापित करने में महत्वपूर्ण हो सकती है.
लेकिन इसके लिए स्पष्ट नियम, पारदर्शी हिसाब-किताब और शिकायतों के समाधान की व्यवस्था आवश्यक होगी. पंजीकरण को कानूनी रूप से अनिवार्य बताने से पहले संबंधित योजना के आधिकारिक नियमों की पुष्टि भी जरूरी है.

* गंजिया बराज का पुल ग्रामीण आवागमन के लिए भी महत्वपूर्ण –

गंजिया बराज का महत्व सिंचाई के अतिरिक्त ग्रामीण संपर्क से भी जुड़ा है. बराज पर बने पुल के माध्यम से आसपास के गांवों के लोगों को आवागमन में सुविधा मिलने की बात कही गई.
बेहतर संपर्क से किसानों को बाजार तक पहुंचने और कृषि उत्पादों की ढुलाई में सहायता मिल सकती है. खरकाई नदी का प्राकृतिक परिवेश स्थानीय आकर्षण का केंद्र भी बन सकता है. हालांकि, पर्यटन की संभावनाओं के साथ नदी की स्वच्छता, कचरा प्रबंधन और पर्यावरण संरक्षण पर ध्यान देना जरूरी होगा. कार्यक्रम में यतीश मल्लिक, मनोज कुमार सिंह और अजय प्रजापति का भी उल्लेख
गंजिया बराज में आयोजित कार्यक्रम से संबंधित समाचार में सेवानिवृत्त इंजीनियर यतीश मल्लिक, मनोज कुमार सिंह अजय प्रजापति के नाम भी शामिल किए जाने हैं.

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