तत्कालीन आयडा प्रबंधन ने तालाब की भूमि पर बहुमंजिली इमारत का नक्शा कर दिया था रद्द, फिर कैसे बन गए इमारत, भविष्य में होते हैं हादसे तो जिम्मेदार कौन




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Saraikela (संजीव मेहता):
आदित्यपुर के एक प्रबुद्ध शिक्षाविद और वरिष्ठ नागरिक प्रो. सुरेंद्र कुमार महतो ने सरायकेला के डीसी समेत सभी संबंधित वरीय अधिकारियों को पत्र लिखकर पूछा है कि जिस कदर जल स्रोतों को भरकर देश में कई बहुमंजिला भवनों का निर्माण के बाद हादसे हो रहे हैं और सैंकड़ों लोगों की जानें जा रही है, उसी तरह के मामले आदित्यपुर नगर निगम क्षेत्र में भी अवश्यम्भावी है. प्रो. महतो ने इस बात के ठोस सबूतों और एक मामले में माननीय सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए फैसले को आधार बनाते हुए कहा है कि आदित्यपुर के शेरे पंजाब के पास M/S City Residency (India) Private Ltd ” ने विगत 2004-05 के दशक में जल स्रोत (तालाब) को भरकर और सीएनटी एक्ट का उल्लंघन कर बहुमंजिला भवन का निर्माण कराया है जहां वर्तमान में सैंकड़ों परिवार रह रहे हैं. प्रो. महतो ने अपने शिकायत में कहा है कि इस प्रोजेक्ट को तत्कालीन आयडा प्रबंधन ने (तब नक्शा आयडा पारित करती थी) ने तालाब की भूमि पर बहुमंजिली इमारत का नक्शा पारित नहीं करते हुए इस प्रोजेक्ट को रद्द कर दिया था. लेकिन फिर कैसे यहां बहुमंजिला इमारत बन गया जो जांच का विषय है. अगर भविष्य में दिल्ली जैसे यहां हादसे होते हैं तो इसका जिम्मेदार कौन होगा ? उन्होंने अपने पत्र के मजमून में कहा है कि –
उपर्युक्त विषय के बारे में सूचित करते हुए कहना है कि उपर्युक्त नामित भवन निर्माता “M/S City Residency (India) Private Ltd “ने विगत 2004-05 के दशक से अब तक गमरहिया अंचल गम्हरिया एवं आदित्यपुर के विभिन्न क्षेत्रों में CNT Act की प्रतिबंधित भूखंडों पर सुप्रीम कोर्ट के इस निर्णय “Civil Appeal No- 4787 of 2001, Appellant..Hinch Lal Tiwary Vrs Kamala Devi and others..Respondents” का उल्लंघन एवं अवमानना कर अनेकों बहुमंजिली इमारतों का निर्माण कर अनभिज्ञ भवन खरीददारों के हाथों बेच दिया है. जिनकी जानकारियां भवन / फ्लैट्स क्रेता को शायद नहीं है. कि उनके हाथों किन किन प्रतिबंधित भूमि तथा जीवित तालाब को मिट्टी/बालू से भरकर उन भरे हुए भूखंडों पर निर्मित बहुमंजिली इमारतों /फ्लैट्स को उन्हें अंधेरे में रखकर बेचे गए हैं? क्योंकि माननीय सुप्रीम कोर्ट ने अपने उक्त निर्णय के द्वारा तालाब/जल स्रोत के भरे भूखंडों पर किसी तरह के निर्माण की अनुमती नहीं दी है, अगर किसी भवन निर्माता ने इस निर्णय का उल्लंघन कर ऐसे भूखण्ड पर निर्माण कार्य किया है तो प्रशासन को ऐसे निर्मित ढांचा को demolish करने का आदेश माननीय सुप्रीम कोर्ट ने दिया है. ज्ञात हो कि इस प्रतिष्ठान का पूर्व का नाम M/S ” Bala Jee Constructions Private Limited ” है और ये दोनों ही प्रतिष्ठान आशियाना ट्रेड सेंटर, आदित्यपुर ( झारखंड) से संचालित होते रहे हैं और इसका प्रोपराइटर/प्रमोटर भी एक ही हैं. इतना ही नही इस संगठन ने CNT Act के अंतर्गत प्रतिबंधित भूमि जो कि आवासीय भूमि की प्रकृति के रूप में है, उन भूमि के अलग प्लॉट पर आवासीय के साथ साथ व्यवसायिक ( grocery, clothe shop and restaurant etc) प्रतिष्ठान भी खोल रखें हैं, जो माननीय सुप्रीम कोर्ट के निर्देश से प्रतिबंधित है, वह यह कि आवासीय भवनों में Commercial Activities संचालित नहीं किए जा सकते हैं. और तो और आदित्यपुर के शेरे पंजाब चॉक स्थित City Residency परिसर में निर्मित अधिकांश बहुमंजिली इमारतों के अधिकांश ब्लॉक (A,B,C,D,E, इत्यादि) के भवन के नक्शे ( plans) सहित बिल्डिंग permits को भी AIADA ( अब परिवर्तित नया नाम JIADA) के तत्कालीन प्रबंध निदेशक ने एक कार्यालय आदेश निकाल कर रद्द कर दिया है और अबतक वे रद्द ही हैं.
और जब इन भवनों के सभी नक्शे और बिल्डिंग permits किसी कारणवश रद्द हैं तो इन निर्मित भवनों का अब कोई अस्तित्व नहीं रह गया है, फिर अगर कभी किसी भी तरह की आकस्मिक घटना मिट्टी धंसान के कारण होती है तो इन भवनों के जान माल के क्षति की जिम्मेवारी किसकी होगी ? क्योंकि ये सभी भवन तालाब/जल स्रोत को भरकर उनके भूखंडों पर निर्मित किये गए हैं. इसी तरह का एक बृहत निर्माण कार्य इस प्रतिष्ठान द्वारा शेरे पंजाब आदित्यपुर प्लॉट संख्या 1206 पर, जो तालाब/ जल स्रोत की भरी हुई भूमि है, लगभग 3 वर्ष पूर्व किया जा रहा था, उसको मेरे द्वारा साक्ष्य के साथ की गई शिकायत पर जांच कर स्थानीय प्रशासन (अंचल कार्यालय, गमरहिया) ने शिकायत को सत्य पाते हुए निर्माण कार्य रोक दिया है, जो अबतक रुका हुआ है. अत: सभी सक्षम प्राधिकार से सादर अनुरोध है कि उपर्युक्त मामले की शीघ्र जांच कर यथोचित कार्रवाई करने की कृपा की जाय.




