दुर्गा पूजा स्थलों की सफाई के लिए शुल्क वसूली पर विवाद, आदित्यपुर नगर निगम के फरमान से पूजा समितियों में नाराजगी, उपायुक्त ने संज्ञान लेकर कार्रवाई का भरोसा दिया

दुर्गा पूजा स्थलों की सफाई के लिए शुल्क वसूली पर विवाद, आदित्यपुर नगर निगम के फरमान से पूजा समितियों में नाराजगी, उपायुक्त ने संज्ञान लेकर कार्रवाई का भरोसा दिया

Sanjeev mehta
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दुर्गा पूजा स्थलों की सफाई के लिए शुल्क वसूली पर विवाद, आदित्यपुर नगर निगम के फरमान से पूजा समितियों में नाराजगी, उपायुक्त ने संज्ञान लेकर कार्रवाई का भरोसा दिय

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Saraikela (संजीव मेहता):
इस वर्ष 2026 में दुर्गा पूजा को लेकर आदित्यपुर नगर निगम द्वारा पूजा पंडालों एवं पूजा स्थलों की साफ-सफाई के लिए शुल्क लिए जाने संबंधी जारी पत्र को लेकर पूजा समितियों में नाराजगी सामने आई है. नगर निगम कार्यालय से जारी पत्र में दुर्गा पूजा के अवसर पर पंडाल स्थल की साफ-सफाई के लिए आवश्यक सेवा लेने की स्थिति में निर्धारित शुल्क का उल्लेख किया गया है. पत्र में सफाई कार्य के लिए मानव श्रम के साथ-साथ JCB और ट्रैक्टर जैसी मशीनरी के उपयोग के लिए भी अलग-अलग शुल्क निर्धारित किए जाने की बात सामने आ रही है.
पूजा समितियों का तर्क है कि दुर्गा पूजा के दौरान पंडाल और उसके आसपास की सफाई सार्वजनिक व्यवस्था से जुड़ा विषय है. ऐसे में पूजा समितियों से सफाई के नाम पर शुल्क लिया जाना उचित है या अनुचित. इस पर प्रशासन को स्पष्ट स्थिति सामने रखनी चाहिए.
इस मामले को लेकर दुर्गा पूजा समितियों की नाराजगी की जानकारी उपायुक्त, सरायकेला- खरसावां नीतीश कुमार सिंह तक जनकल्याण मोर्चा के अध्यक्ष एवं वरीय अधिवक्ता ओमप्रकाश ने बात पहुंचाई है. उपलब्ध जानकारी के अनुसार उपायुक्त ने मामले को गंभीरता से लेते हुए पूजा प्रबंधकों को इस संबंध में समाधान की दिशा में कार्रवाई का भरोसा दिया है. अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि नगर निगम के इस आदेश पर जिला प्रशासन क्या कदम उठाता है और क्या पूजा समितियों से सफाई शुल्क वसूली के आदेश की समीक्षा की जाती है. पूजा समितियों का कहना है कि वे प्रशासन और नगर निगम के साथ सहयोग करने को तैयार हैं, लेकिन शुल्क निर्धारण और वसूली को लेकर स्पष्ट नियम, आदेश का कानूनी आधार और सभी पूजा समितियों पर समान व्यवस्था सार्वजनिक की जानी चाहिए.
अब निगाह प्रशासन की अगली कार्रवाई पर मामला उपायुक्त के संज्ञान में आने के बाद पूजा समितियों और स्थानीय लोगों की नजर अब जिला प्रशासन की कार्रवाई पर है. यदि आदेश में संशोधन, स्पष्टीकरण या शुल्क वसूली पर कोई निर्णय लिया जाता है, तो इससे विवाद की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी.

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