Saraikela (संजीव मेहता):



जमशेदपुर पुलिस का साइबर अपराधियों के विरुद्ध बड़ी कार्रवाई, सिम बेचने वाले दो POS एजेंट समेत जियो कर्मचारी गिरफ्तार, पांच मोबाइल और नौ सिम बरामद
केवाईसी में धोखाधड़ी कर अतिरिक्त सिम कार्ड निकालते थे आरोपी, मोटी रकम लेकर साइबर अपराधियों को करते थे सप्ला
Saraikela :
जमशेदपुर पुलिस ने साइबर अपराध के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए साइबर अपराधियों को अवैध तरीके से सिम कार्ड उपलब्ध कराने वाले गिरोह का पर्दाफाश किया है. पुलिस ने इस मामले में दो POS एजेंट समेत जियो कंपनी के एक कर्मचारी को गिरफ्तार किया है. गिरफ्तार आरोपियों की पहचान रौनक कुमार, सन्नी कुमार साव और प्रकाश कुमार के रूप में हुई है. इनमें रौनक कुमार और सन्नी कुमार साव POS एजेंट हैं, जबकि प्रकाश कुमार जियो कंपनी का कर्मचारी बताया गया है. पुलिस ने आरोपियों के पास से पांच मोबाइल फोन और नौ सिम कार्ड बरामद किए हैं. जांच में खुलासा हुआ है कि आरोपी सिम कार्ड जारी करने के दौरान केवाईसी (KYC) प्रक्रिया में हेराफेरी कर अतिरिक्त सिम कार्ड निकालते थे. इसके बाद इन सिम कार्डों को मोटी रकम लेकर साइबर अपराधियों को बेच दिया जाता था. इन सिम कार्डों का इस्तेमाल साइबर ठगी समेत अन्य ऑनलाइन अपराधों में किया जा रहा था. पुलिस के अनुसार, दूरसंचार विभाग की ओर से वरीय पुलिस अधीक्षक, पूर्वी सिंहभूम को पत्र भेजकर कुछ POS एजेंटों की साइबर अपराधियों के साथ मिलीभगत की खुफिया जानकारी दी गई थी. सूचना मिलने के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू की. जांच के दौरान रौनक कुमार, सन्नी कुमार साव और जियो कंपनी के कर्मचारी प्रकाश कुमार की भूमिका संदिग्ध पाई गई. जांच में सामने आया कि आरोपियों की मिलीभगत से कई ऐसे सिम कार्ड जारी और एक्टिवेट किए गए थे, जिनका इस्तेमाल साइबर अपराध में हो रहा था. इन सिम कार्डों से संबंधित शिकायतें दूरसंचार विभाग के चक्षु (CHAKSHU) पोर्टल और नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) पर भी दर्ज थीं. इस मामले में जमशेदपुर साइबर अपराध थाना में कांड संख्या 109/2026, दिनांक 1 नवंबर 2026 को प्राथमिकी दर्ज की गई है. आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 की विभिन्न धाराओं के अलावा आईटी एक्ट 2008 और दूरसंचार अधिनियम 2023 के तहत मामला दर्ज किया गया है. पुलिस गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ कर इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की जानकारी जुटा रही है. साथ ही यह भी पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि अब तक कितने अवैध सिम कार्ड जारी किए गए और किन-किन साइबर अपराधियों तक उनकी आपूर्ति की गई थी. मामले में आगे की जांच जारी है.




